मंगलवार, 27 मार्च 2012

गंगा या दुर्गा को माँ कहना बन्द करो नौटंकीबाजो

इस समय नवरात्रे चल रहे है जगह जगह मन्दिर  मन्दिर देवी के पन्डाल सजाये गये है जगराते हो रहे है, देवी जी को प्रसन्न करने के तमाम उपाय प्रयास जोर शोर से किये जा रहे है. इस मौसम मे तमाम औरते ऐसी आराम से दिख जाती है जिन पर देवी जी की सवारी भी आती है. लोग बाग नवो दिन के व्रत कर रहे है. मै यह देख कर हैरान रह जाता हू कि मुहल्ले की जो सबसे कुटनी औरत होगी उसके ऊपर देवी जरूर आयेगी. जिस आदमी की जुबान मा बहनो की गाली से सनी होगी वह जै माता दी जोर से बोल् रहा होगा. जितने उठायीगीर और छुटभैये लोग है वो सब मुह मे मसाला दबाये जगराते हेतु चन्दा वसूली कर रहे होगे. कोढ मे खाज यह कि सारी प्लास्टर आफ पेरिस की मूर्तियो को गंगा मे विसर्जित कर गंगा जल को और जहरीला कर ये लोग गंगा  मा और  दुर्गा मा को प्रसन्न करते है. प्रत्येक साल सैकड़ों प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद उससे निकले केमिकलयुक्त रंग, प्लास्टिक आदि से गंगा प्रदूषित होती जा रही है. इसे पर्यावरण को तो नुकसान हो ही रहा है, गंगा में रहने वाले जीवों के अस्तित्व भी खतरे का बादल मंडराने लगा है.मूर्तियों को बनाने में कई रंगों के अलावा फेवीकॉल, माजा खल्ली, इमली पाउडर, गोंद, चमक के लिए वारनिस आदि का इस्तेमाल किया जाता है.  मूर्तियों के बाल सन के बनाये जाते हैं. बाद में उसे रंग से काला किया जाता है. मूर्ति विसर्जन से गंगा में कई हानिकारक केमिकल मिल जाता है. इससे जलीय जीवों के साथ-साथ पर्यावरण को भी नुकसान होता है. केमिकल युक्त पानी पीने से मछलियों में में कई तरह की बीमारियां पैदा होती है. इसे खाने से मनुष्य के स्वास्थ्य को भी नुकसान होता है. प्लास्टिक खाने से मछलियों के गले में चोक हो जाता है और वह मर जाती हैं. 
अब सवाल यह उठता है कि बात बात मे मा के नाम पर गाली देने वाले लोग देवी दुर्गा को मा कहने के अधिकारी है, गंगा मैया के अस्तित्व को समाप्त करने मे कोई कोर कसर न रखने वाले किस मुह से मा गंगा कह सकते है?

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत-बहुत प्रेरणसपड़ लेख है मैंने भी फेसबुक पर इसे शेयर कर दिया है। सद्प्रयास हेतु धन्यवाद।

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  2. आज की सच्चाई से रूबरू कराती पोस्ट आभार

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  3. अज्ञानता और अंध विश्वास में फंसा मनुष्य स्वयं अपनी कब्र खोद रहा है .
    लेकिन अफ़सोस , सुनता कोई नहीं .
    विचारणीय विषय .

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  4. अधिकतर इन सब में वो लोग है जो फोकट है. साल में ५-७ बार चंदा इकठ्ठा कर गुटका जर्दा शराब का इंतजाम... उनको नहीं पता की आने वाली पीढयों को हम क्या देंगे ..

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