रविवार, 2 जनवरी 2011

हरी धरती एक अभियान है जिसकी दिशा 'संरक्षणात्मक विकास' की ओर है



नए साल पर 'हरी धरती' का गठन उस आन्दोलन के अंकुर फूटने सरीखा है जिसकी दिशा 'संरक्षणात्मक विकास' की ओर है. वस्तुतः आधुनिकता की वर्जनाओं को तोडती हुई उत्तर आधुनिकता(post modernity) मात्र अंधेरी सुरंग के सिवा कुछ और न साबित हुई, जबकि उम्मीद थी कि औद्योगीकरण और आधुनिकीकरण के के दुष्प्रभावों को उत्तर आधुनिकता में ढूढ़ लिया जायेगा. यह मात्र प्रतिक्रियात्मक बन कर रह गया. नतीजा यह हुआ कि आधुनिकता के बजबजाते सीवर सभ्यता रूपी गंगा को काला करने लगे.   हरी धरती एक अभियान  है जो पागलखाने और खुली जेल में तब्दील हो चुके समाज को पुनर्गठित करने हेतु संकल्पबद्ध है.  इस क्रम में बिगड़ी आब ओ हवा को ठीक करना प्राथमिकता है. कोई आन्दोलन तब सफल होता है जब उसकी वैचारिक जड़े मजबूत होती है. इसके लिए सभी ब्लोगर बांधवों से हार्दिक अपील करता हूँ कि वो हरी धरती से जुड़े और अपने बहुमूल्य विचारों से सामाजिक और पारिस्थितिकीय तंत्र को सुधरने में सहयोग करे.
यदि आपके पास पर्यावरण , सामाजिक विषमता , तकनीक से सम्बंधित कोई भी आंकडा , रचना , शोध पत्र क्षेत्र कार्य इत्यादि हो तो उसे  haridharti@gmail.com पर भेजने का कष्ट करें । आपके नाम परिचय चित्र को प्रकाशित किया जायेगा
हमारा लक्ष्य जल, जंगल, जमीन और जानवरों के संरक्षण में निहित है. 
चलते चलते एक बात और स्पष्ट कर दू कि महज टिप्पणी या चर्चा पाना इस ब्लॉग का उद्देश्य नहीं है. 
जैसा कि दुष्यंत कुमार कहते है

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए.

1 टिप्पणी:

  1. केवल बातो से नहीं अब कार्यान्वयन का समय आ गया है इस प्रयास में सबका सहयोग वांछनीय है

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